Safalta Ki Kunji | परिश्रम सफलता की कुँजी है

Safalta Ki Kunji: मेंहदी हसन ने हंसतेहंसते स्कूली शिक्षा पूरी कर ली। कॉलेज में भी वह सालदरसाल सरलता से उत्तीर्ण होता हुआ अप क्लासेज से अप होता चला गया। कभी उसने पढ़ाई की टेंशन नहीं ली और किसी को दी, क्योंकि कभी वह पढ़ाई के बारे में विस्तृत चर्चा करता ही था किसी को बोझिल लगे। वह जीवन खूब एंजोय करता और परीक्षायें सिर पर आती तो बाजार से Question बैंक, गाइड व कुंजियाँ लाकर पढ़ता, सक्सेस मंत्रा का इस्तेमाल करके वो हमेशा पास हो जाता।

समय बदला, वो समय भी आया जब उसने कम्पटीशन एग्जाम में भाग लेना शुरु किया। साथ ही उसने शिक्षाध्ययन भी चालू रखा। वर्षों की कोशिशों के बाद उसे रेलवे में ट्रेकमैन की नौकरी मिल गई। अब उसका समय रेल के ट्रैक के किनारे काम करते भरने लगा। दलेर दिलेर था।

बचपन से ही समय का पूरा फायदा उठाता। एंजोय के समय एंजोय करता पढ़ाई के समय पढ़ाई। लगभग फिक्स टाइम पर दोस्तों के बीच से उठ जाता फिर भले ही दोस्तों को बुरा लगे, दोस्ती रहे या जाए।

Parishram Safalta Ki Kunji Hai – परिश्रम सफलता की कुँजी है

निर्धारित पाठ्य पुस्तक से निर्धारित गृहकार्य करता, ना हो पाता तो परिवार के योग्य सदस्यों से सहायता लेता, ट्यूशन करता, मित्रों से पूछता या फिर स्कूल सब्जेक्ट टीचर से डांट खाकर भी बारबार पूछने में हिचकता। स्कूल से कॉलेज, कॉलेज से डिग्री कॉलेज उसकी शिक्षा का प्राफ ऊँचा होता गया। दसवीं और बारहवीं में भी उसका अंक प्रतिशत अच्छा रहा। फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ का अच्छा ज्ञान होने के कारण दलेर ने आईआईटी परीक्षा की तैयारी करना तय किया। अच्छे आईआईटी कॉलेज से उसने आईआईटी क्वालिफाई किया।

बीच में ही उसे एक प्रसिद्ध संस्थान में 13 लाख रु. सालाना पैकेज में प्लेसमेंट मिल गया। दलेर और मेहंदी इन दोनों केसों का अध्ययन किया जाए तो उनके प्रारंभ में भी अंतर है और परिणाम में भी। मेहंदी ने शॉर्टकट से पास होने के लिए उस तकनीक को फॉलो किया जिस पर अधिकांशत: स्टूडेंटस चलते हैं। शिक्षा शब्द संस्कृत के ‘शिक्षु’ धातु से बनता है, इसका अर्थ हैसोखना या लिखा”

इसका तात्पर्य शिक्षा सीखनेसिखाने की प्रक्रिया है शिक्षा के लिए विद्या शब्द का भी उपयोग किया जाता है जिसका अर्थ होता है जानना। सा विद्या या विमुक्तये‘ (विद्या उसे कहते हैं जो विमुक्त कर दे) प्राचीन भारत शिक्षा को इसी दृष्टि से देखता था।

हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा के निकट आते ही एजुकेशनल बुक मार्केट में कुंजियों, गाइड्स, क्येशन बैंक, गैस पेपर की बाढ़ जाती है और पुस्तकों से आच्छादित दुकानों पर उन छात्रछात्राओं की जो कम समय होने या स्वाभाविक रूप से सफलता के लिए शॉर्टकट तकनीक अपनाना समझदारी समझते हैं।

फिर दौर शुरू होता है यथासम्भव रटने का, जो कि प्राय: छात्रों को परीक्षा पास करा देता है, किन्तु कभीकभी अनुत्तीर्ण होने का स्वाद भी चखना पड़ता है। छात्रों का मानना होता है कि गाइड कुंजियों में परीक्षा में आने वाले संभावित प्रश्न और उसके उत्तर होते हैं।

सालभर नहीं पढ़ने के बाद कुछ दिनों में ही चुनिंदा प्रश्नों की बदौलत उत्तीर्ण होने की इच्छा रखने वाले छात्रों के हिस्से में हानि आती है, मले ही प्रत्यक्ष में वह लाभ ही क्यों दिखाई दे परीक्षा में आते ही तनाव होना स्वाभाविक है। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर छात्र केवल परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकते हैं बल्कि तनाव को भी दूर रख सकते हैं।

सफलता की कुंजी मन की एकाग्रता

पहले कठिन विषयों को पढ़े उसके बाद आसान विषया आजकल छात्र शिक्षा को कम समय देते हैं। इसके लिए वे कुंजी या गाइड से ही परीक्षोपयोगी तैयारी करते हैं। कुंजी या गाइड से वे परीक्षा में तो किसी तरह उत्तीर्ण हो जाते हैं, कई बार अंक प्रतिशत भी उनका अच्छा जाता है, लेकिन विषय से सम्बन्धित विस्तृत ज्ञान उन्हें नहीं हो पाता। पाठ्य पुस्तक में विस्तार से उदाहरण सहित समझाया जाता है; आवश्यकता पड़ने पर चित्र, रेखाचित्र, आफ और मानचित्र द्वारा भी तथ्यों को स्पष्ट किया जाता है या विस्तार दिया जाता है।

यदि छात्रछात्राएं वर्ष भर मनोयोग से शिक्षा केन्द्र (स्कूल या कॉलेज), घर कोचिंग सेंटर में पढ़े तो निश्चित ही परीक्षा में सफलता मिलती है और परीक्षा के उपरांत भी काफी कुछ जीवन भर वैषयिक ज्ञान स्मरण रहता है। सरकार भी इस बार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की ओर विशेष ध्यान दे रही है।

कॉलेजों में कुंजी व गाइड का उपयोग बिल्कुल भी करने की सख्त चेतावनी दी जा रही है। शासन स्तर पर मिली शिकायतों के बाद अब इस पर सख्ती से निपटने का प्रयास किया जाएगा।

रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था कि हमारी शिक्षा स्वार्थ पर आधारित परीक्षा पास करने के संकीर्ण मकसद से प्रेरित यथाशीघ्र नौकरी पाने का जरिया बनकर रह गई है जो एक कठिन और विदेशी भाषा में साझा की जा रही है। इसके करण हमें नियमों, परिभाषाओं, तथ्यों और विचारों को बचपन से रटन की दिशा में धकेल दिया है। यह तो हमें समय देती है और ही प्रेरणा ताकि हमें ठहरकर सोच सकें और सीखे हुए को आत्मसात् कर सकें। परिश्रम सफलता की कुँजी है

 प्रारंभ में दी गई दलेर और मेहंदी की शॉर्ट स्टोरी शॉर्ट टाइम में सक्सेस के लिए कुंजी जैसे माध्यमों को उपयोग में लेते दलेर और रहने का नकारात्मक पहलू और पाठ्यपुस्तक द्वारा विस्तृत अध्ययन का सकारात्मक “सफलता की कुँजी है” दर्शाती है। जिहवा से रटकर अल्प समय के लिए अवचेतन में अंकन से बेहतर है कि अच्छी तरह पड़कर समझकर अवचेतन में दीर्घ या जीवनपर्यन्त शिक्षा को स्थान दिया जाए।

राज ऋषि

6 thoughts on “Safalta Ki Kunji | परिश्रम सफलता की कुँजी है”

  1. Books se padh kr hi gyan prapt ho sakta h jo hamare mind me long time tak rahta h. Bina Books k support k koi bhi success nhi mil sakti h.

    Reply
  2. It’s real time story.
    It’s time to real competition so student must be gain real knowledge about particular subject , not superficial .
    Deep and extended knowledge comes only by read textbook not guide.
    So students must be pay attention towards full knowledge not half.
    Because half knowledge will be danger it’s comes towards dark.
    Text books like a true friends.

    Reply
  3. The above story was absolutely right shortcuts hme sirf Chhoti success tk lekr jata h… Or aaj k tym p sb guide sample papers inhi p depend rh gye h jisse hmari knowledge sirf limited rh jati h…..

    Reply

Leave a Comment